Monday, 15 September 2014

                                                         अच्छा दोष या भयानक दोष 

हर इंसान कोई न कोई डर से है परेशान,
मैं भी हूँ एक ऐसे ही डर का शिकार.

जहाँ जाती हूँ वहां मिल जाती है,
जहाँ सोती हूँ वहां पर आ जाती है.

कुछ काली सी है तो कुछ गोरी सी है,
आँखों से घूर-घूर कर डराती भी है.

कभी-कभी तो इतना डराया की वाशरूम भी ना जाये पाए हम,
डर के मारे किचन में कुछ जाके खा भी ना पाए हम.

कभी दरवाज़े के पीछे होना,तो कभी मेज़ के नीचे से निकलना,
हर तरह से कब्ज़ा कर रखा है घर का हर एक कोना-कोना.

बहुत सताया बहुत रुलाया,घर के जीनो पर भी बनाया.
जब हमने उनको भगाना चाहा,तो उन्होंने हमे हर अंगेल से देखना चाहा.

इनकी इन अदाओं से बढे है इनके भाव,
जिसे देखते ही उड़ जातें है सब के आओ-भाव.

उसके नाम से भी उड़ जातें है मेरे होश,
उसके गिरने को कहते है अच्छा दोष.

क्या बताऊं कैसे बताऊं,ये दिख जाती है रोज़-रोज़
ये है छिपकली रानी जो देती है भयानक डोज.......
 

Monday, 25 August 2014

                             लोगो से किया कनेक्शन,दिल को हुआ सेटीसफेकशन

जब जनता थी कांग्रेस से बेहाल,
तब आया मोदी का पीऍम बन्ने का पैगाम.

जब आया चुनावी दौर का अंजाम,
तब मोदी ने किया अच्छे दिनों का आगाज़.

जनता अभी भी कर रही अच्छे दिनों का इंतज़ार,
पर मेरी ज़िन्दगी में आ गया है अच्छे दिनों का पैगाम.

आर्टिकल और न्यूज़ बुलेटन की तारीफों से जहाँ मुझे मिला एक नया आत्मविश्वास,
तो वही मैम से मिली चॉकलेट ने कर दिया दिल को तार-तार.

आगे भी चलता रहेगा न्यूज़ बुलेटन और आर्टिकल का दौर,
और युही बना रहेगा तारीफों का माहौल......

Sunday, 24 August 2014

                                                         मेरे सफ़र का हमसफर 

जब घर से निकलती हूँ तो नज़रे सिर्फ तुझे तलाशती है,
जब घर में होती हूँ तो तेरी तस्वीर चारो तरफ नाचती है.
घर से निकलती हूँ तो तेरे साथ कॉलेज तक का सफ़र पूरा करती हूँ,
तो वही कॉलेज से घर तक के सफ़र का समय भी तेरे साथ बिताती हूँ.
तू जो ना मिले तो डरता है दिल,
कॉलेज जाने को मना करता है दिल.
तेरे साथ बिताये है ज़िन्दगी के अच्छे-बुरे लम्हे,
तेरे साथ बैठ के सुने है नई-नई फिल्मों के अच्छे बुरे गाने.
तू ही मेरा दिल है तू ही मेरी जान,
ऑटो तुम मुझे यूँही ही मिलते रहना सुबह शाम.  

Saturday, 23 August 2014

                                                         दिल को भाता तुम्हारा नेटवर्क

पहले ज़िन्दगी में ना ही कोई नशा था ना ही कोई प्यार,
तुम जो आये ज़िन्दगी में तो मुझे मिला तुम्हारा साथ.
जब तुमको मिलाया माँ-पापा से तो उन्होंने जताया ऐतराज़,
फिर भी ना जाने क्यूँ दिल को मंजूर है आज भी तुम्हारा साथ.
तुमसे मिलना बातें करना आज भी आता है दिल को राज़,
पर ना जाने क्यूँ ऐसा दिल को लगा की जैसे तुम्हे मिल गया हो किसी और का साथ.
तुम्हारा रुखा सा व्यवहार करता था दिल को बेहाल,
लेकिन तुम्हारी प्यार भरी बाते कर देती है दिल को तार-तार.
आज भी तुम मेरी ज़िन्दगी के हर पल में हो मेरे साथ,
ऐ मेरे मोबाईल जब तक तुम्हारी बैटरी हो तेरे साथ तब तक तुम बने रहना मेरी ज़िन्दगी की सांस......
  

Friday, 22 August 2014

                                          हर जनरेशन का अलग वैलेंटाइन सेलिब्रेशन  

वैलेंटाइन डे प्यार का दिन और प्यार करने वालों का दिन.इस दिन को हर कोई मनाता है फिर चाहे वो बूढ़े हो या फिर जवान.जहाँ आज कल के युवा कपल अपने पार्टनर को टेडी,रोज,चॉकलेट देकर अपने प्यार का इज़हार करते है तो वही आजकल के बुद्धे अपने पार्टनर को टेडी,रोज,चॉकलेट देने  के साथ साथ अपने फीमेल पार्टनर के बालों में गजरा लगाकर उन्हें हग भी कर लेते है.प्यार तो आजकल सभी करते है.फिर चाहे वो vi क्लास  का बच्चा हो या फिर नर्सरी का.अच्छी लड़की देखते ही मन डोलने लग जाता है.दिल के बैकग्राउंड में रोमांटिक सोंग्स बजने लग जाते है जैसे की तुम ही हो,मेरे हाँथ में तेरा हो...कुछ को तो स्कूल की लड़कियों में कोई इंटरेस्ट नहीं होता.वो तो कॉलेज की लड़कियों के सपने देखते है लेकिन सपनो पे पानी तो तब फिर जाता है जब बॉयज कॉलेज में एडमिशन्स लेना पड़ता है.बचारे सपने कांच ली तरह टुकड़ों में टूट कर बिखर जाते है.सोचा क्या था और हुआ क्या.इससे अच्छा तो यही है की स्कूल की लड़की को पता लिया होता.वैसे आजकल की लडकियां भी कम नहीं है.फिर चाहे वो लड़की नर्सरी की हो या vi क्लास की हो या फिर कॉलेज की.हैण्डसम,सिक्सपैकस और स्पाइकस बालों वाले लडको को देखते ही मन डोलने लग जाता है.मुसीबत तो तब होती है जब गर्ल्स कॉलेज में एडमिशिन हो जाता है और कॉलेज भी ऐसा जहाँ पर स्कूल हो.वैसे हम अपने कॉलेज मजीसिपिएस का एक्साम्प्ले ले सकते है.यहाँ लादिक्यान हमेशा परेशान रहती है.अरे नहीं-नहीं पढाई,नोट्स,टीचर्स,फैसिलिटीस इन सब से परेशान नहीं रहती है बल्कि लड़कों के ना होने की वजह से परेशान रहती है.बस गनीमत इस बात की है की क्लास 12 के लड़के दिख जाते है तो थोड़ी परेशानी कम हो जाती है.फिर भले ही लंच 25 मिनट का हो तो क्या हुआ अगर लड़का उनके सामने से जा रहा हो तो या उनसे कुछ दूरी पर खड़ा हो तो वो आराम से 25 मिनट में से 20 मिनट उसको देखने में बीता सकती है.अरे कोई नहीं लंच नहीं किया तो क्या हुआ कम सेकम कॉलेज के 5 घंटो में से 20 मिनट तक उस लड़के को देख तो लिया.बेचारी कुछ लडकियां वैलेंटाइन डे पर बस देखती रह जाती है.वैसे वैलेंटाइन वीक आने पर मार्किट भी जोरो शोरो से प्यार के रंग में रगने लग जाता है.जो रोज पहले 10-15 रुपये में मिल जाता था वही वैलेंटाइन वीक स्टार्ट होने पर 50-100 में बिकने लग जाता है.एक बार ग्रेजुएशन लेवल के कपल्स तो फिर भी एडजस्ट कर लेते है लेकिन बेचारे स्कूल के जूनियर और नर्सरी वालों की तो बात ही रहने दो.उनके पास तो पॉकेट मनी ही नहीं होती.बस मीठी मीठी बातें कर के ही लड़कियों को पटाये रखते है लेकिन बेचारे स्कूल के जूनियर बच्चो का क्या होता होगा जिनकी पॉकेट मनी 50-100 तक फिक्स रहती है.बेचारों को समझ ही नहीं आता की वो क्या ले.सारी चीज़े अच्छी क्वालिटी और ब्रांडेड चाहिए होती है.जैसी की डेरी मिल्क सिल्क चॉकलेट वो 50 रुपये से ऊपर वाली,अच्छा सा खिला हुआ बड़ा रोज,एक अच्छा सा और बड़ा टेडी जिसमे आई लव यू लिखा हो,और साथ ही एक बड़ा सा वैलेंटाइन डे कार्ड जिसके अन्दर उनकी खूब सारी तारीफे और जानू,जान,डिअर,शोना,डार्लिंग जैसे शब्दों का भर पूर डोस दिया हो.तब जाकर उनका मूड अच्छा नहीं बल्कि ठीक ठाक होता है.अरे भाई वो सारी चीज़े बॉयफ्रेंड के मुँह से सुने बिना कहाँ से चैन मिलेगा.कुछ तो आज के दिन सफल हो जाते है लेकिन कुछ लोगो के गालों पे चार उँगलियों और एक अंगूठे का निशाँ कायदे से छप जाता है.छपे भी क्यूँ न बहुत ओवर कॉन्फिडेंस से वाइट या येलो लेने के बजाये रेड रोज लेके पहुच जाते है उन्हें प्रोपोसे करने के लिए और इम्प्रेस करने के लिए गाना भी तैयार करके जाते है जैसे की तूने मारी एंट्रियाँ रे,और जब गाल पे थप्पड़ पड़ता है तो तुरंत ही सारे तारें आसमान से गिर कर आँखों के सामने नज़र आने लगते है और तब उनका चेहरा ख़ुशी से लाल की जगह थप्पड़ से बेरंग हो जाता है.तब उन्हें समझ आता है की वैलेंटाइन डे बोर्ड एग्जाम से भी ज्यादा कठिन है.लेकिन बोर्ड एग्जाम में तो किसी तरह सेतो पास हो जातें है लेकिन वैलेंटाइन का पपेर आसानी से पास नहीं हो पाटा है.इसलिए कहते है की एग्जाम देने से पहले पूरी तैयारी अच्छे से कर लेनी चाहिए वरना फ़ैल होने के चांसेस ज्यादा हो जाते है.. 

Thursday, 21 August 2014

                           दो इंसान एक दूसरे से अनजान और बिना मिले हो गया प्यार 

आज की मोस्ट पॉपुलर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट है फेसबुक.हर कोई आज कल फेसबुक पर मिलता है.आज की दुनिया मैं कोई ये नहीं कह सकता की पता नहीं अब कब मिलेंगे क्यूंकि फब जो आ गया है लोगो को जोड़ने के लिए.कोई अपने फ्रेंड से मिल जाता है तो कोई अपने रिश्तेदारों से.लेकिन क्या लव बर्ड्स भी मिल सकते है ऐसा कुछ पता न था शुरुआत में.विनय खन्ना जो की दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढता है और दिल्ली का रहने वाला है.नताशा चैटर्जी जो की एमिटी यूनिवर्सिटी में पढ़ती है और लखनऊ की रहने वाली है.विनय ने एक अच्छी सी प्रोफाइल पिछ लगाई.वैसे मानना तो पड़ेगा की क्या बॉडी है उसकी.क्या सिक्स पैक्स है उसके.वो कहते है न एक दम भोकाली टाइप्स और वही दूसरी ओर नताशा स्लीवलेस बलौर कलर टॉप एंड ब्लैक कलर की कैपरी में अपनी पिछ लगाई.बंदी तो ये भी अच्छी लग रही थी.कमर तक बाल,बड़ी-बड़ी आँखें,गुलाबी होंठ,गोरा रंग.कोई भी देख के तुरंत फिसल जाए.नताशा की फ्रेंड लिस्ट विनय पहले से था.रविवार शाम 6 बजे एक हाथ में चाय का कप ओर दूसरा हाथ लैपटॉप के कीबोर्ड पे,''हाय चार्मिंग लुकिंग ग्रेट इन प्रोफाइल पिक'' विनय ने सेंड किया.पता है किसी नताशा को.''हेलो स्टन्निंग थैंक यू सेंड''किआ नताशा ने विनय को.बातें तो ऐसे हो रही थी की जैसे सालों से एक दूसरे को जानते हो लेकिन ऐसा नहीं था.बात तो पहली बार हुई थी दोनों में.दोनों एक दूसरे पे फ़िदा.दोनों एक दूसरे की तारीफ करने में लगे पड़े थे.चलो अच्छी बात है आखिर दोनों दोस्त बन गए है.आखिर वो मैसेज टाइप कर ही दिया विनय ने ''और बताओ कब मिल रही हो''.आखिर आज्ञा अपनी लाइन पे.बस मौका मिल जाए मिलने का.''माई होम इस इन दिल्ली एंड टुमारो आई आम कमिंग फॉर माई सिस्टर इंगेजमेंट,देन सी यू ओन थर्सडे एट 5 पी.एम.''नताशा ने सेंड कर दिया.''कम सून,आई विल बी वेटिंग फॉर यू''विनय ने सेंड कर दिया.नताशा दिल्ली पहुंची और थर्सडे को विनय से दिल्ली यूनिवर्सिटी के सामने मिलने गयी.ओहफो.नताशा उसे ऐसे देख रही थी जैसे कोई टीचर अपने स्टूडेंट को,पता है क्यों क्यूंकि विनय आधा घंटा देर से आया था.पहली डेट और इतना लेट.आज इसकी खैर नहीं.लेकिन किस्मत अच्छी थी बच गया क्यूंकि पहली बार था ना इसलिए.दोनों कॉफ़ी शॉप पे गए वहां दो कोल्ड कॉफ़ी आर्डर की फिर दोनों बातें करने लगे एक दूसरे के साथ.''आई वांट टू से समथिंग टू यू''विनय ने कहा.व्हाट टेल मी''नताशा ने कहा.आई वांट टू से दैट की की....''अरे व्हाट हैपन सै न''नताशा ने कहा.''आई वांट टू सै दैट की आई लव यू''.बस इतनी सी बात कहनी थी.''सीरियसली यू लव मी'' नताशा ने कहा.हाँ आई लव यू आ लोट'' विनय ने कहा.ये सब बातें हो रही थी और इसे कोई और भी सुन रहा था.पता है कौन ''रिया''विनय की प्रेजेंट गर्लफ्रेंड.अब तो इसकी कायदे से वाट लगने वाली थी.रिया विनय की पीछे वाली सीट पे बैठी थी.विनय ने उसे नहीं देखा था.नताशा को इम्प्रेस करने के लिए विनय ने गुलाब ल फूल निकाला और बैठ गया घुटनों पर पुरे कस्टमर्स के सामने.नताशा ''आई लव यू,आई लव यू वेरी मच ,यू आल्सो लव मी''.नताशा जैसे ही हाँ कहने जा रही थी वैसे ही पीसे दाँतों से पीछे से आवाज़ ''आई या बेबी आई लव यू टू आई कांट लीव विथ आउट यू बेबी.आई लव यू सो मच''.विनय इधर उधर देखने लगा.वो देख ही रहा था की तब तक रिया ने विनय का कालर पीछे से पकड़ा.उसने पीछे मुद कर देखा तो बेचारा डर गया.डरता क्यों नहीं इतनी भयानक जो लग रही थी वो.एक तो रेड ड्रेस,रेड लिपस्टिक और 100 डिग्री से ज्यादा का बॉडी टेम्परेचर.अब तो ये पीटा.बेचारा इतना मार खाया और सिर्फ रिया ने ही नहीं बल्कि नताशा ने भी हाथ साफ़ कर किया.बेचारा बिखरी की हालत में सोफे शॉप से निकला.कपडे फट गए थे उसके.नताशा ने टू कसम खा ली थी की आज के बाद से ''नो फेसबुक प्रपोज़ल्स''.पैच अप होने से पहले ही ब्रेक अप हो गया.विनय को तो नुकसान हुआ ही साथ ही शॉप के मैनेजर कोभी भरपाई करनी पड़ गयी.अरे आखिर दोनों ने मारने के लिए शॉप के सामानों का इस्तेमाल जो किया था.वैसे इससे लगभग ये तो प्रूव हो गया की ना तो कोई लड़कियों के गुस्से में पड़ेगा और ना ही आज से कोई फब पे प्रोपोज़ करेगा...        

Wednesday, 20 August 2014

                                                              मेरी बदलती ज़िन्दगी 

कहते है ज़िन्दगी बहुत छोटी है और इस ज़िन्दगी के हर एक छोटे-मोटे पल पल को समझदारी व ख़ुशी से जीना चाहिए.यह बात तो बहुत सुनी थी मगर  समझा तब जब अपनी ज़िन्दगी के हर पल को हाथों से तेजी फिसलते हुए देखा.tab समझा की ज़िन्दगी बहुत अनमोल है जो शायद ही दुबारा मिले.मैं यानी अनामिका को अगर आपने तीन साल पहले देखा होता तो आज आपके जो विचार है वो ना होते.चलिए मैं आपको आज से तीन साल पहले की अनामिका से मिलवाती हूँ.अनामिका जिसका उस समय मतलब था शर्म,हिचकिचत,बोलने में कंजूसी,हसने में कंजूसी.उस समय मेरी चाल-ढाल अलग थी.सब्र की कोई सीमा नहीं थी.कोई कुछ भी कहे बस उसको सुन लेना मेरी आदत में था.कभी गुस्सा भी ठीक से करना नहीं आता था.बोलना सबसे था लेकिन ज्यादा नहीं शायद इसकी वजह मेरा ज्यादा लोगो पर भरोसा ना कर पाना था.हमेशा से अपनी बातों को अपने तक रखती थी.शायद उस वक़्त इन सब वजहों से मैं जमाने से पीछे छूट जा रही थी.कभी फैशन करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी.पहले कभी बालों को इस्टैलिश नहीं कटवाया क्यूंकि तब कुछ लडकियां थी जिनके स्कूल में फैशन करने पर या बाल कटवाने पर वो प्रिंसिपल मैम की नज़रों में गलत लडकियां बन जाती थी.इन चीज़ो को देखकर कभी हिम्मत नहीं हुई ये सब करने की.मुझे अपनी छवि से बहुत प्यार था.जिसे मैं किसी हालत में खराब नहीं करना चाहती थी.लेकिन कहते है ना ज़िन्दगी में कुछ पल ऐसे भी आते है जो आपको बदल कर रख देते है और आप को देख कर,महसूस कर के सोचते है की क्या मैं भी कभी ऐसी हो सकती हूँ.मेरी ज़िन्दगी को बदलने वाले पलों ने मेरी ज़िन्दगी में तब दस्तक दी जब मैं 11th क्लास में पहुंची.जिस सोच ने मेरे अंदर बदलाव लाया वो थे की अब बस स्कूल के 2 साल बचे है और मौज मस्ती का 1 साल क्यूंकि 1 साल यानी की 12th क्लास तो टीचर्स की डाट और लेक्चर्स में निकल जाना है.मेरा 11th क्लास का अवतार देख कर सबकी आँखे बड़ी हो जाती थी और मुँह खुला रह जाता था और फिर चालु होती थी कंट्रोवर्सीज लड़कियों के बीच में खुसफुसाहट.अरे अनामिका को देखा कितनी बदल गयी है.कुछ ज्यादा ही बोलने लगी है,दूसरे ने कहा लगता है इसका बॉयफ्रेंड भी है,तीसरे ने कहा हाँ-हाँ मैंने भी सुना है.मैंने एक लड़के से बात क्या कर ली वो मेरा बॉयफ्रेंड बन गया.तब पता चला जो लडकियां सामने अच्छी बनती थी वो अंदर से कितनी खोटी थी.बुरा लगता था ये सब देख कर लेकिन अब मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता था की कौन क्या सोचता है या कहता है.मुझे बस खुश रहना था.डर का फोबिया दिमाग से निकल गया था.खुश तो इतना रहने लगी थी की जब फिल्म मबीकेडी यानी मेरे ब्रदर की दुल्हन देखि तो क्लास के आखरी पीरियड में शराब पीने की एक्टिंग और फिर सीट पे खड़े होके कटरीना कैफ की एक्टिंग कर डाली.हालाँकि वो मुझे पसंद नहीं है लेकिन ख़ुशी का नशा ही कुछ ऐसा चढ़ा था की कुछ समझ नही आया.वाट तो तब लगी जब प्रिंसिपल मैम ने मुझे ये सब करते हुए देख लिया लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं कहा और चुप चाप चली गयी.तब महसूस हुआ की वो शायद वो इतनी बुरी भी नहीं है.धीरे-धीरे समय बीता और कॉलेज में आई.मेरी बची कूची हिचकिचाहट और घबराहट भी गुलाब गैंग में एंटर करते ही गायब हो गयी.अब जो अनामिका है वो आपके सामने है.मैं पहले क्या थी और क्या आज हूँ.ऐसा नहीं की मैंने शर्म और डर को एकदम से त्याग दिया है.ये तभी महसूस होती है जब मैंने कुछ गलत किया हो.लेकिन अब बोलने में,महसूस करने में,समझने में और गुस्सा करने में कोई पाबन्दी नहीं लगाती हु.आज मुझे लगता है की मैं जमाने के साथ चलती हूँ.घर में सब मुझे देख कर यही कहते है की मैं पहले ''भोलूराम'' थी लेकिन अब ''बोलूराम'' बन गयी हूँ.अब तो बस इस छोटी सी ज़िन्दगी को जीने का नशा सवार है और ज़िन्दगी में कुछ अच्छा कर गुजरने का नशा सवार है.क्यूंकि कहते है ना की दुनिया चमकते हीरे को देखना पसंद करती है ना की जलते कोयले को.इसलिए मैं उस चमकते हीरे की तरह लोगो की नज़रों में हमेशा के लिए चमकना चाहती हूँ..                                                         

Tuesday, 19 August 2014

                                                 सपनो ने चुना राजनीति का रास्ता

कॉलेज से जब छुट्टी हुई तो बड़ा सुकून मिला.मैं को एक ख़ुशी मिली चलो अब घर को जाना है.ख़ुशी तो हो रही थी लेकिन साथ ही एक विषय को लेकर दिमाग में कश्मकश भी चल रही थी.वह विषय था मेरे सपनो की दुनिया.गोमतीनगर से राजाजी पुरम तक दिमाग में उछल कूद करते मेरे विचार आखिर घर तक पहुंचे.घर पहुँच कर जब आराम करने के लिए लेती तब सबसे पहला सवाल मेरे मंन में उठा की क्या इस विषय पर हमारी रोली मैम ने भी कभी कुछ लिखा होगा.पता नहीं और ये सब सोचते-सोचते मैं कब नींद की आग़ोश में चली गयी पता ही ना चला.जब नींद खुली तब घडी में 6:30 हो रहे थे.ये समय भी ना कितनी जल्दी बीत जाता है.खैर फिर से रोली मैम का दिया हुआ विषय मेरे सर पे तांडव करने लगा.बार-बार बस दिमाग में एक ही बात चल रही थी रोली मम=मेरे सपनो की दुनिया.खैर ये सब सोचते विचारते घडी में 7:30 बज चुके थे और मै हाथ में कलम और सामने कॉपी खोल कर बैठ गयी थी.अब समझ ना आया की मैं लिखू क्या तभी मेरा माथा ठनका और मैंने अपने आप से कहा''बगल में छोरा,गावं में ढिंढोरा''.अरे जब राजनीति है तो किसी और सपने के बारे में क्यों सोचू.आज का हर युवा राजनीति को गन्दा कहता है.कोई भी इसमें नहीं जाना चाहता है.अगर ये राजनीति गन्दी हुई है तो वो हमारी राजनीति में मीठी-मीठी बातें कर के लोगो को बहलाने वालें हमारे आज कल के नेता है.आज के आम लोग बस इनकी अच्छी-अच्छी बातों और इनकी बड़े-बड़े वादों के बीच फस कर रह गए है.और आज कल तो ये सीन जोरो शोरो से चल रहे है.अरे भाई चुनाव आने वाले है तो इसीलिए आपको 2 घंटे की भाषण वाली मूवी देखने को मिलेगी.जहाँ नरेंद्र मोदी राहुल गांधी को शहजादा बोलने में लगे है और चाय को अपना विजय मार्ग बनाने में लगे है तो वही राहुल गांधी इस समय सय्यम से काम लेते हुए राजनीति नहीं ''काजनीति'' और ''हर हाथ शक्ति,हर हाथ तरक्की'' के माध्यम से लोगो को जोड़ने में लगे हुए है और अब कोई बचा है तो वो है अरविन्द केजरीवाल.वो तो इस समय सिर्फ फुस्सी राकेट की तरह बन कर रह गए है .जो की उड़ा तो बहुत तेजी से लेकिन ऊपर जाकर बाकी रॉकेट्स के जजबो को देखकर कोने से निकल कर चल दिया और नीचे वाले बस ऊपर ही देखते रह गए.आये तो थे वो हज़ारों उमीदों को लेकर लेकिन 48 दिन की सरकार में कुछ ना कर पाने पर,लोकसभा बिल के पास ना होने पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया और उनकी सरकार एक ''ब्रांडेड'' सरकार में बदलने से पहले ''चाइनीज़'' सरकार में तब्दील होते हुए दिखने लगी.आज कल हर भाषण में आपको कुछ ऐसे मुद्दे सुनने को मिलेंगे जो नेताओं के लिए बस बोलने के लिए रह गए है जैसे की भ्रष्टाचार,महगांई,महिलाओं की सुरक्षा,बेहतर शिक्षा,बेरोजगारी,मजबूत प्रधानमंत्री इत्यादि.हर बार सरकार यही वादें कर के आती है और हर बार आम आदमी को निराशा मिलती है,और मिले भी क्यों ना जो सरकार बनती है वो 5 साल तक लोगो के पैसों,उमींदों,भावनाओं से खेलती है और फिर चली जाती है.आखिर कब तक ये सब चलता रहेगा.कब इन इस्तिथियों में सुधार होगा.मेरा सपना यही है की मै एक दिन राजनीति मै जाऊं.उन चीज़ो को जानू,परखू की जो काम हमें इतना मुश्किल दिखाया जाता है क्या वो सही मैं इतना मुश्किल है?क्या सही में इस देश की परिस्तिथि को सुधारना मुश्किल है लेकिन भले ही वो मुश्किल हो लेकिन नामुमकिन नहीं.और अभी जब तक मैं राजनीति मैं नहीं जा रही तब तक मेरा एक ही लक्ष्य रहेगा और वो रहेगा एक सही इंसान को चुन कर उसे जिम्मेदारी देना क्यूंकि''माई वोट इस माई पावर''और जब तक हमारे वोट किसी अच्छे उमीदवार को नहीं मिलेंगे तब तक वो उस कुर्सी पर नहीं बैठ सकेगा और मैं करोड़ों वोटो में अपने अमूल्य वोट को बेकार नहीं जाने दूंगी.आज हर एक को वोट डालने का संकल्प लेना चाहिए क्यूंकि कहते है ना की ''सोच बदलो देश बदलेगा''.हर एक का सपना अपनी सोच बदल कर सही इंसान को चुनना होना चाहिए जिसकी वजह से हम अपने देश को एक अच्छे और नए मार्ग की और अग्रसर होते हुए देख सके...         

Monday, 18 August 2014

                                               कल की अनारकली,आज की विरोधकाली

कहते है प्यार एक ऐसी चीज़ है जिसे ना तो कोई समझा पाया है और ना ही कोई समझ पाया है.जिससे पूछा उसने यही कह के समझाया की जब हम दूसरों के लिए कुछ अलग महसूस करे,जब हम किसी के बारें में सोचते रहे,उसके बारे में बातें करे,उसके साथ  रहना चाहे इन हालदों को देख कर यह घोषित कर दिया जाता है की उन्हें प्यार हो गया है लेकिन ज्यादातर लोग उन्हें इस उलझन में फसें रह जातें है और एक गाना जो इन सारी उलझनों पर एकदम फिट बैठता है वो है''अजीब दास्ताँ है यह,कहाँ शुरू कहाँ  खत्म,यह मंजिलें है कौन सी,ना वो समझ सके ना हम''.वैसे बहुत सटीक लिखा गया है इस गाने को.कभी-कभी तो लोगो को पहली ही नज़र में प्यार हो जाता है और यह कोई अफवाह नहीं बल्कि सच है क्यूंकि ऐसा हमारे इतिहास में भी हुआ है.ऐसे बहुत से जोड़े है जो आज भी हमारे सामने प्यार का प्रतीक बन कर खड़े है जैसे की शाहजहाँ-मुमताज,सलीम-अनारकली,हीर-रांझा,जोधा-अकबर इत्यादि.लेकिन पहली नज़र वाले प्यार का शिकार जो हुए थे वो थे सलीम.सलीम को अनारकली से पहली नज़र में ही प्यार हो  गया था और उनकी नज़रें तब अनारकली के प्यार में पड़ गयी थी जब अनारकली ने पहली बार उनके सामने मुजरा किया था.सलीम को तो मानो उनकी दुनिया ही मिल गयी हो.आये थे वो 14 साल बाद अपने पिता की राजगद्दी को संभालने लेकिन राजगद्दी संभालने से पहले ही वो किसी और को अपने दिल में संभालने लग गए.धीरे-धीरे अनारकली भी सलीम के प्यार में पड़ गयी और तभी से शुरू हो गया छुप-छुप कर मिलने का सिलसिला और इस परिस्तिथि में जो गाना फिट बैठता है वो है''छुप-छुप के,छुप-छुप के चोरी से चोरी,छुप-छुप के,छुप-छुप के रे''.अब समय आ गया था जब सलीम ने अपने पिता को अपने रिश्ते के बारे में बताया लेकिन मानो उनकी तक़दीर में उन दोनों का मिलना नहीं लिखा था.जब पिता अकबर को उनके रिश्ते के बारें में पता चला तो उन्होंने इस रिश्ते को यह कह कर इंकार कर दिया की अनारकली उनके जैसे शहजादों के परिवार की नहीं है.वो एक नौकरानी और नाचने वाली है जिसकी वजह से वो दोनों एक नहीं हो सकते.बहुत मनाने के बाद भी जब अकबर नहीं माने तो सलीम ने अपने प्यार को पाने के लिए उनसे युद्ध किया लेकिन उसमे भी वो हार गए और फिर अकबर ने उनके सामने दो विकल्प रखे की या तो वो अनारकली को उन्हें सौप दे या फिर वो अपनी जान दे दे.जिसमे सलीम ने अपनी जान देना चुना लेकिन अनारकली ने अपने प्यार को बचाने के खातिर अकबर के सामने अपनी ज़िन्दगी उनको सौपने का एलान करती है लेकिन अपनी एक इक्छा वो उनके सामने रखती है की वो सलीम के साथ एक रात बिताना चाहती है और एक रात के बाद सलीम अनारकली एक दूसरे के ना हो सके.दूसरे दिन अकबर ने अनारकली को दिवार में चुनवा कर दोनों को जुदा कर दिया.आखिर किस हद्द तक अकबर का यह फैसला सही था और साथ ही साथ अनारकली और सलीम का भी.जहाँ अकबर ने उन्हें एक नहीं होने दिया तो वही अनारकली और सलीम ने भी इस फैसले को सही साबित किया.अनारकली ने अपनी जान देने का फैसला किया लेकिन अगर वो सलीम से प्यार करती थी तो उन्होंने साथ ज़िन्दगी बिताने का फैसला क्यों नहीं लिया.एक रिश्ते को अधूरा छोड़ कर उन्होंने मरने का फैसला किया.शायद अगर में उनकी जगह होती तो  ऐसा ना करती क्यूंकि मैंने और सलीम ने तो अकबर को मानना चाहा था लेकिन वो नहीं माने थे और दुनिया में कहीं ऐसा नहीं लिखा है की दो प्यार करने वालों को उनके माँ-बाप की इजाजत मिलने पर ज़िन्दगी साथ बिताने का हक़ मिले.मैं तो सलीम के साथ भाग कर अपना एक अलग आशियाँ बनाती जिसमे प्यार करने वालों को पूरा हक़ होता की वो जिस से प्यार करना चाहे कर सकते है और पूरी ज़िन्दगी साथ में बिता सकते है क्यूंकि कहते है ना प्यार वो बला है जो करे वो भी पछताए जो ना करे वो भी पछताए तो इसलिए मैं प्यार कर के पछताना पसंद करुँगी और अगर शायद उस समय की अनारकली ने भी प्यार कर के  पछताने का फैसला लिया होता तो शायद आज उनका प्यार इतिहास के पन्नो में कमजोरी का नहीं बल्कि मजबूती का प्रतीक होता.कहते है की''आधा इश्क़ धीरे-धीरे पूरा हो जाता है लेकिन इनका इश्क़ आधा था,आधा है और हमेशा की लिए इतिहास के पन्नो में आधा बन कर रह गया है''... 

Sunday, 17 August 2014

                                                                   मैं और तुम

बहुत ख़ास रिश्ता है मेरा और तम्हारा.जैसे मछली पानी के बिना,आसमान चाँद सितारों के बिना,लडकियां मेक अप के बिना और सुनैना मैम हैप्पी बर्थडे किये बिना नहीं रह सकती वैसे ही मैं और तुम एक दूसरे से अलग नहीं रह सकते.तुम हमेशा हफ्ते में कभी एक या दो दिन मिलने आते हो और मेरी टेंशन को दूर कर देते हो फिर वो टेंशन सुनैना मैम या रोली मैम का आर्टिकल लिखना हो.नेहा मैम के दिए हुए नोट्स को पढ़ना हो या फिर रेखा मैम  को मेल करना हो ये सारी टेंशन तो मुझे याद ही नहीं रहती क्यूंकि  डेढ़ घंटे तक मुझे सोचने का मौका नहीं ही नहीं देते हो.बस अपनी कहते रहते हो और मै सुनती रहती हूँ.आप सोच रहे होंगे की आखिर वो कौन है जो मुझे इतना खुश रखता है और कभी मायूस नहीं होने देता है.तो मै आपको बता दो की वो और कोई नहीं है कपिल है,अरे कॉमेडी नाइट्स विथ कपिल.मुझे बेसब्री से सैटरडे और संडे का इंतज़ार रहता है.मैं कोई और शो देखू ना देखू लेकिन ये तो मेरी life का कंपल्सरी पार्ट बन गया है.इस दिन ना तो प्रेसिडेंट पापा की न्यूज़ सुनने की मांग को पास करती है ना ही मम्मी के serials देखने की मांग पास होती है और ना ही भाई की स्पोर्ट्स चैनल देखने की मांग पास होती है.उस दिन प्रेसिडेंट सारे बिल्स को खारिज कर देता है क्यूंकि मैं कपिल का एक भी शो मिस नहीं कर सकती हूँ.मुझे उसकी हर एक बात बहुत पसंद है माना की वो लड़कियों की बहुत बुराई करता है लेकिन उन सारी बुराइयों को लास्ट में यह कह कर खत्म कर देता है की 'हमेशा औरतों की इज़्ज़त करे उन्हें मान सम्मान de'.वही दूसरी और मुझे उसकी उसके घर आये मेहमानो से हुई मस्ती बहुत राज़ आती है फिर चाहे वो शाहरुख़ के साथ  हो या फिर सलमान के साथ और अगर कोई एक्ट्रेस जैसे की दीपिका,प्रियंका,करीना आजाये तब तो उसका उन्हें मक्खन लगाने का अंदाज़ बहुत पसंद आता है.वही उसका अपने पडोसी पालक और उसकी माँ से लड़ना और अपने नौकर को डाटना,अपनी बेवड़ी दादी को सम्भालना, अपनी ट्वेंटी टू ईयर ओल्ड हॉट एंड सेक्सी बुआ की शादी के लिए लड़का ढूँढना,अपनी बीवी से झगड़ा करना इस शो में जान दाल देता है और अगर कोई कमी रह जाती है तो वो सिद्धू पाजी की अनलिमिटेड शायरी और कुछ ख़ास ऑडियंस उसे पूरा कर देती है.यानी की यह पूरा शो एंटरटेनमेंट का फुल तड़का है जो रोते हुए को भी हसा दे.वैसे अभी तो आप समझ  ही गए होंगे की मुझे कपिल और उसके इस शो से इतना प्यार क्यों है.अब तो मुझे इस सैटरडे का इंतेज़्ज़र है क्यूंकि एक बार फिर से प्रेसिडेंट सारी पार्टीज के बिल को खारिज कर देगा और अगर किसी ने जबरजस्तीको मिस नहीं करने का,और अगर कभी कोई परेशान करेगा तो उसे बाबाजी का ठुल्लु दिखाने का''...

Saturday, 16 August 2014

बहुत गर्व महसूस होता है यह सोच कर की मैं एक भारतीय हूँ क्यूंकि एक ऐसे देश में जन्म लिया है  जहाँ के रीति रिवाज़,चाल चलन,हमारे दूसरे देशो से अलग है,जहाँ पर इतने धर्म है.हमारा देश हमेशा से एक धार्मिक स्थल के रूप में जाना और माना गया.हमारा देश बहुत सी चीज़ो में दूसरे में दूसरे देशों से अलग रहा है लेकिन शायद हमारा देश एक चीज़ में असफल हो गया है और वो भी आज से नही सदियों से असफल होता चला आ रहा है.हमारा देश जहाँ हमेशा दुर्गा,लक्ष्मी,को पूजा गया है लेकिन शायद लड़की को यह दर्जा दे कर भी उसका सम्मान नही किया गया है.हर जगह लड़की को अपमान का सामना करना पड़ा है.हमारा देश हमेशा से पुरुष प्रधान रहा है.कभी लड़कियों को आगे नही आने दिया है.एक नन्ही सी जान जब अपनी माँ के गर्भ से जुड़ती है,धीरे धीरे अपनी माँ की धड़कनो को महसूस करती है.अपनी माँ के गर्भ में नौ महीने बिताती है और जब वह माँ के गर्भ से निकलती है तोह गिनी चुनी सासें लेती ही है की उसकी सासें कोई और छीन लेता और वह कोई पराया नही होता बल्कि अपना होता वो है उसके माँ-बाप.एक नन्ही सी जान को इसलीए मार दिया जाता है क्यूंकि वो एक लड़की है.हर एक बच्चे को माँ चाहिए,भाई को बहन,पति को पत्नी,बॉयफ्रेंड को गर्लफ्रेंड तोह एक माँ-बाप को बेटी क्यों नही चाहिए.लोग यह क्यों भूल जातें है की जब तक औरत रहेगी तब तक यह दुनिया रहेगी.इस दुनिया सिर्फ एक औरत चला सकती है.अगर लड़की ने किसी तरह जन्म ले भी लिया तोह उसका छोटी उम्र में बाल विवाह करा दिया जाता है.उसे एक बोझ समझा जाता है.ससुराल में सास ससुर और पति द्वारा लड़की पर अत्याचार किया जाता है.उसे दहेज़ के लिए मार पीटा जाता है.अगर पति मर गया तोह लड़की को उसका जिम्मेदार ठहराया जाता है.उसे अपना पूरा जीवन एक सफ़ेद साडी पहन कर बीतना पड़ता है.हमेशा आदमी औरत को अपनी जरुरत के लिए चाहता है और फिर उसे छोड़ देता है.कुछ माँ बाप तोह लड़कियों को बेच देते है सिर्फ इसलिए जिससे उन पर से वह बोझ हमेशा के लिए हट जाए.लड़कियों को कभी इजाजत नही मिली.ना ही तोह किसी लड़की की शर्ते पूरी हो पाती है और ना ही उसका कोई वजूद रह जाता है.एक औरत जो हमेशा दूसरों का ध्यान रखती है,अपनी खुशियां त्याग कर अपनों की खुशियों के बारे में सोचती है,अपना घर छोड़ कर अपनी पूरी ज़िन्दगी दूसरे के घर में जा कर बीतती है,इतना कुछ करने के बाद भी उसे क्या मिलता है कुछ नहीं.पूरी ज़िन्दगी वह बस जलील होती है,बेइज़्ज़ती सहती है,अत्याचार सहती है और सब कुछ सहते-सहते एक दिन वो अपनी आंकेह बंद कर लेती है तब भी किसी को उसके जाने का दुःख नही होता बल्कि लोगो को यह सोच कर ख़ुशी मिलती है की चलो काम से काम एक बला   टली.सदियों से चली आ रही यह सारी प्रथाएं आज भी हमारे देश के पिछड़े वर्गो में निभायी जाती है.ऐसा नहीं है हमारा देश बदला नहीं है आज भी लडकियां आगे बढ़ रही है,पढ़ रही है,नौकरी कर रही है,अपने हक़ के लिए लड़ रही है.आज यह जो भी बदलाव है वो  हमारे देश के कानून और लोगो को मिल रही शिक्षा से है.लेकिन आज भी कई ज़िंदगियाँ अपने हक़ के लिए लड़ रही है और जिन्हे हक़ मिले है वो भी ज़िन्दगी शान्ति से नहीं बीता पा रही है और इसकी वजह है लोगों की कुरुरता.आज हर लड़की को बहार आने जाने में डर लगता है और इसकी वजह से लड़को की हार.लड़की हर तरह से मजबूत है बस अपने शरीर से नहीं है.हर पल लड़की को बलात्कार जैसी चीज़ो से जूझना पड़ता है.जिसकी वजह से कई लडकियां अपने सपने को पूरा नहीं कर पा रही है.                               आखिर क्यों हमेशा लड़की को ऐसे उत्पीड़नों का सामना करना पड़ता है और यह कब तक होता रहेगा.कब लड़कियों को उनका हक़ मिलेगा.आखिर कब दोनों एक समान समझा जाएगा.ऐसे बहुत से सवाल है  जिनका जवाब हर एक लड़की किसी न किसी कोने में ढूंढ रही है.ना जाने कब लोगो की सोच बदलेगी और साथ ही हमारा देश.शायद यह आने वाला वक़्त ही बता सकता है की देश की बिटिया जिन्दा रहेगी या यह दुनिया देश की बेटियों के बिना ही सागर में समा जायेगी.....    
                                                  If its meant to be,it will be.....