अच्छा दोष या भयानक दोष
हर इंसान कोई न कोई डर से है परेशान,
मैं भी हूँ एक ऐसे ही डर का शिकार.
जहाँ जाती हूँ वहां मिल जाती है,
जहाँ सोती हूँ वहां पर आ जाती है.
कुछ काली सी है तो कुछ गोरी सी है,
आँखों से घूर-घूर कर डराती भी है.
कभी-कभी तो इतना डराया की वाशरूम भी ना जाये पाए हम,
डर के मारे किचन में कुछ जाके खा भी ना पाए हम.
कभी दरवाज़े के पीछे होना,तो कभी मेज़ के नीचे से निकलना,
हर तरह से कब्ज़ा कर रखा है घर का हर एक कोना-कोना.
बहुत सताया बहुत रुलाया,घर के जीनो पर भी बनाया.
जब हमने उनको भगाना चाहा,तो उन्होंने हमे हर अंगेल से देखना चाहा.
इनकी इन अदाओं से बढे है इनके भाव,
जिसे देखते ही उड़ जातें है सब के आओ-भाव.
उसके नाम से भी उड़ जातें है मेरे होश,
उसके गिरने को कहते है अच्छा दोष.
क्या बताऊं कैसे बताऊं,ये दिख जाती है रोज़-रोज़
ये है छिपकली रानी जो देती है भयानक डोज.......
हर इंसान कोई न कोई डर से है परेशान,
मैं भी हूँ एक ऐसे ही डर का शिकार.
जहाँ जाती हूँ वहां मिल जाती है,
जहाँ सोती हूँ वहां पर आ जाती है.
कुछ काली सी है तो कुछ गोरी सी है,
आँखों से घूर-घूर कर डराती भी है.
कभी-कभी तो इतना डराया की वाशरूम भी ना जाये पाए हम,
डर के मारे किचन में कुछ जाके खा भी ना पाए हम.
कभी दरवाज़े के पीछे होना,तो कभी मेज़ के नीचे से निकलना,
हर तरह से कब्ज़ा कर रखा है घर का हर एक कोना-कोना.
बहुत सताया बहुत रुलाया,घर के जीनो पर भी बनाया.
जब हमने उनको भगाना चाहा,तो उन्होंने हमे हर अंगेल से देखना चाहा.
इनकी इन अदाओं से बढे है इनके भाव,
जिसे देखते ही उड़ जातें है सब के आओ-भाव.
उसके नाम से भी उड़ जातें है मेरे होश,
उसके गिरने को कहते है अच्छा दोष.
क्या बताऊं कैसे बताऊं,ये दिख जाती है रोज़-रोज़
ये है छिपकली रानी जो देती है भयानक डोज.......
No comments:
Post a Comment