Saturday, 21 February 2015

                                                                                                                                                                                                              शिकायतों  के चक्रव्यूह में फसा आम आदमी                                                                            
                                             
आज कल के समय में हर किसी को शिकायत होती है.किसी को समाज से,किसी को सरकार से,किसी को भगवान् से किसी को अपने आप से.शिकायत कब कहा किसको किससे हो जाए ये तो कोई नहीं जानता है.जैसे सब को शिकायत होती है वैसे मुझे भी शिकायत है.मुझे शिकायत है उन लोगो से जो लोग धर्म के नाम पर

अपना धंधा करते है.आम आदमी को बेवकूफ बनाते है.आज के समय में अगर बात करे तो आज देश के हर गली मोहोल्ले में एक मंदिर तो जरुर दिख जाएगा.चाहे वो छोटा हो या बड़ा.भगवान् को मनाने के लिए हर एक इंसान ना जाने कितना चढ़ावा चढ़ाता है.ना जाने कितने फूल चढ़ाता है.पंडितों के कहने पर हर इन्सान पूजा

,कथा करवाता है.फिर चाहे उसमे कितने भी पैसे क्यूँ ना लगे.अगर कोई उतने पैसे नही दे पाता है तो थोड़ी बहत बारगेनिंग पंडितों द्वारा हो जाती है लेकिन ये हर एक केस में नहीं हो पाता है.कभी-कभी तो पंडित आम आदमी को डरा कर भी पैसे वसूल लेते है.आज हर इंसान धर्म के चक्रव्यूह में फसा है.ना जाने क्यूँ लोग इतनी

खबरे सुनने के बाद भी अपने दिमाग नहीं खोलते है.आज के समय में कितनी मूवीज धर्म के नाम पर चल रहे बिज़नस पर बनी है जिससे लोगो में जागरूकता फेलें लेकिन आज भी इस बिज़नस में कोई गिरावट नहीं आई है.आज भी महा शिवरात्री में लोग गरीब को दूध देने की बजाये शिवलिंग पे दूध चढाते है,ना जाने कितने लोग

पंडितों की दक्षिणा देते और भी ना जाने क्या.मुझे शिकायत है उन लोगो से जो लोग आज भी इस धर्म के अंधविश्वास में फसें है.इतनी जागरूकता होने के बाद भी वो लोग पंडितों की बातों में आकर वो काम कर जाते है जो उन्हें नहीं करना चाहिए.ना जाने आखिर कब तक ये धंधा यूँही चलता रहेगा.ना जाने कब वो दिन आएगा

जब लोग इस चक्रव्यूह से निकल कर सही गलत में फर्क कर पायेंगे....  

Monday, 15 September 2014

                                                         अच्छा दोष या भयानक दोष 

हर इंसान कोई न कोई डर से है परेशान,
मैं भी हूँ एक ऐसे ही डर का शिकार.

जहाँ जाती हूँ वहां मिल जाती है,
जहाँ सोती हूँ वहां पर आ जाती है.

कुछ काली सी है तो कुछ गोरी सी है,
आँखों से घूर-घूर कर डराती भी है.

कभी-कभी तो इतना डराया की वाशरूम भी ना जाये पाए हम,
डर के मारे किचन में कुछ जाके खा भी ना पाए हम.

कभी दरवाज़े के पीछे होना,तो कभी मेज़ के नीचे से निकलना,
हर तरह से कब्ज़ा कर रखा है घर का हर एक कोना-कोना.

बहुत सताया बहुत रुलाया,घर के जीनो पर भी बनाया.
जब हमने उनको भगाना चाहा,तो उन्होंने हमे हर अंगेल से देखना चाहा.

इनकी इन अदाओं से बढे है इनके भाव,
जिसे देखते ही उड़ जातें है सब के आओ-भाव.

उसके नाम से भी उड़ जातें है मेरे होश,
उसके गिरने को कहते है अच्छा दोष.

क्या बताऊं कैसे बताऊं,ये दिख जाती है रोज़-रोज़
ये है छिपकली रानी जो देती है भयानक डोज.......
 

Monday, 25 August 2014

                             लोगो से किया कनेक्शन,दिल को हुआ सेटीसफेकशन

जब जनता थी कांग्रेस से बेहाल,
तब आया मोदी का पीऍम बन्ने का पैगाम.

जब आया चुनावी दौर का अंजाम,
तब मोदी ने किया अच्छे दिनों का आगाज़.

जनता अभी भी कर रही अच्छे दिनों का इंतज़ार,
पर मेरी ज़िन्दगी में आ गया है अच्छे दिनों का पैगाम.

आर्टिकल और न्यूज़ बुलेटन की तारीफों से जहाँ मुझे मिला एक नया आत्मविश्वास,
तो वही मैम से मिली चॉकलेट ने कर दिया दिल को तार-तार.

आगे भी चलता रहेगा न्यूज़ बुलेटन और आर्टिकल का दौर,
और युही बना रहेगा तारीफों का माहौल......

Sunday, 24 August 2014

                                                         मेरे सफ़र का हमसफर 

जब घर से निकलती हूँ तो नज़रे सिर्फ तुझे तलाशती है,
जब घर में होती हूँ तो तेरी तस्वीर चारो तरफ नाचती है.
घर से निकलती हूँ तो तेरे साथ कॉलेज तक का सफ़र पूरा करती हूँ,
तो वही कॉलेज से घर तक के सफ़र का समय भी तेरे साथ बिताती हूँ.
तू जो ना मिले तो डरता है दिल,
कॉलेज जाने को मना करता है दिल.
तेरे साथ बिताये है ज़िन्दगी के अच्छे-बुरे लम्हे,
तेरे साथ बैठ के सुने है नई-नई फिल्मों के अच्छे बुरे गाने.
तू ही मेरा दिल है तू ही मेरी जान,
ऑटो तुम मुझे यूँही ही मिलते रहना सुबह शाम.  

Saturday, 23 August 2014

                                                         दिल को भाता तुम्हारा नेटवर्क

पहले ज़िन्दगी में ना ही कोई नशा था ना ही कोई प्यार,
तुम जो आये ज़िन्दगी में तो मुझे मिला तुम्हारा साथ.
जब तुमको मिलाया माँ-पापा से तो उन्होंने जताया ऐतराज़,
फिर भी ना जाने क्यूँ दिल को मंजूर है आज भी तुम्हारा साथ.
तुमसे मिलना बातें करना आज भी आता है दिल को राज़,
पर ना जाने क्यूँ ऐसा दिल को लगा की जैसे तुम्हे मिल गया हो किसी और का साथ.
तुम्हारा रुखा सा व्यवहार करता था दिल को बेहाल,
लेकिन तुम्हारी प्यार भरी बाते कर देती है दिल को तार-तार.
आज भी तुम मेरी ज़िन्दगी के हर पल में हो मेरे साथ,
ऐ मेरे मोबाईल जब तक तुम्हारी बैटरी हो तेरे साथ तब तक तुम बने रहना मेरी ज़िन्दगी की सांस......
  

Friday, 22 August 2014

                                          हर जनरेशन का अलग वैलेंटाइन सेलिब्रेशन  

वैलेंटाइन डे प्यार का दिन और प्यार करने वालों का दिन.इस दिन को हर कोई मनाता है फिर चाहे वो बूढ़े हो या फिर जवान.जहाँ आज कल के युवा कपल अपने पार्टनर को टेडी,रोज,चॉकलेट देकर अपने प्यार का इज़हार करते है तो वही आजकल के बुद्धे अपने पार्टनर को टेडी,रोज,चॉकलेट देने  के साथ साथ अपने फीमेल पार्टनर के बालों में गजरा लगाकर उन्हें हग भी कर लेते है.प्यार तो आजकल सभी करते है.फिर चाहे वो vi क्लास  का बच्चा हो या फिर नर्सरी का.अच्छी लड़की देखते ही मन डोलने लग जाता है.दिल के बैकग्राउंड में रोमांटिक सोंग्स बजने लग जाते है जैसे की तुम ही हो,मेरे हाँथ में तेरा हो...कुछ को तो स्कूल की लड़कियों में कोई इंटरेस्ट नहीं होता.वो तो कॉलेज की लड़कियों के सपने देखते है लेकिन सपनो पे पानी तो तब फिर जाता है जब बॉयज कॉलेज में एडमिशन्स लेना पड़ता है.बचारे सपने कांच ली तरह टुकड़ों में टूट कर बिखर जाते है.सोचा क्या था और हुआ क्या.इससे अच्छा तो यही है की स्कूल की लड़की को पता लिया होता.वैसे आजकल की लडकियां भी कम नहीं है.फिर चाहे वो लड़की नर्सरी की हो या vi क्लास की हो या फिर कॉलेज की.हैण्डसम,सिक्सपैकस और स्पाइकस बालों वाले लडको को देखते ही मन डोलने लग जाता है.मुसीबत तो तब होती है जब गर्ल्स कॉलेज में एडमिशिन हो जाता है और कॉलेज भी ऐसा जहाँ पर स्कूल हो.वैसे हम अपने कॉलेज मजीसिपिएस का एक्साम्प्ले ले सकते है.यहाँ लादिक्यान हमेशा परेशान रहती है.अरे नहीं-नहीं पढाई,नोट्स,टीचर्स,फैसिलिटीस इन सब से परेशान नहीं रहती है बल्कि लड़कों के ना होने की वजह से परेशान रहती है.बस गनीमत इस बात की है की क्लास 12 के लड़के दिख जाते है तो थोड़ी परेशानी कम हो जाती है.फिर भले ही लंच 25 मिनट का हो तो क्या हुआ अगर लड़का उनके सामने से जा रहा हो तो या उनसे कुछ दूरी पर खड़ा हो तो वो आराम से 25 मिनट में से 20 मिनट उसको देखने में बीता सकती है.अरे कोई नहीं लंच नहीं किया तो क्या हुआ कम सेकम कॉलेज के 5 घंटो में से 20 मिनट तक उस लड़के को देख तो लिया.बेचारी कुछ लडकियां वैलेंटाइन डे पर बस देखती रह जाती है.वैसे वैलेंटाइन वीक आने पर मार्किट भी जोरो शोरो से प्यार के रंग में रगने लग जाता है.जो रोज पहले 10-15 रुपये में मिल जाता था वही वैलेंटाइन वीक स्टार्ट होने पर 50-100 में बिकने लग जाता है.एक बार ग्रेजुएशन लेवल के कपल्स तो फिर भी एडजस्ट कर लेते है लेकिन बेचारे स्कूल के जूनियर और नर्सरी वालों की तो बात ही रहने दो.उनके पास तो पॉकेट मनी ही नहीं होती.बस मीठी मीठी बातें कर के ही लड़कियों को पटाये रखते है लेकिन बेचारे स्कूल के जूनियर बच्चो का क्या होता होगा जिनकी पॉकेट मनी 50-100 तक फिक्स रहती है.बेचारों को समझ ही नहीं आता की वो क्या ले.सारी चीज़े अच्छी क्वालिटी और ब्रांडेड चाहिए होती है.जैसी की डेरी मिल्क सिल्क चॉकलेट वो 50 रुपये से ऊपर वाली,अच्छा सा खिला हुआ बड़ा रोज,एक अच्छा सा और बड़ा टेडी जिसमे आई लव यू लिखा हो,और साथ ही एक बड़ा सा वैलेंटाइन डे कार्ड जिसके अन्दर उनकी खूब सारी तारीफे और जानू,जान,डिअर,शोना,डार्लिंग जैसे शब्दों का भर पूर डोस दिया हो.तब जाकर उनका मूड अच्छा नहीं बल्कि ठीक ठाक होता है.अरे भाई वो सारी चीज़े बॉयफ्रेंड के मुँह से सुने बिना कहाँ से चैन मिलेगा.कुछ तो आज के दिन सफल हो जाते है लेकिन कुछ लोगो के गालों पे चार उँगलियों और एक अंगूठे का निशाँ कायदे से छप जाता है.छपे भी क्यूँ न बहुत ओवर कॉन्फिडेंस से वाइट या येलो लेने के बजाये रेड रोज लेके पहुच जाते है उन्हें प्रोपोसे करने के लिए और इम्प्रेस करने के लिए गाना भी तैयार करके जाते है जैसे की तूने मारी एंट्रियाँ रे,और जब गाल पे थप्पड़ पड़ता है तो तुरंत ही सारे तारें आसमान से गिर कर आँखों के सामने नज़र आने लगते है और तब उनका चेहरा ख़ुशी से लाल की जगह थप्पड़ से बेरंग हो जाता है.तब उन्हें समझ आता है की वैलेंटाइन डे बोर्ड एग्जाम से भी ज्यादा कठिन है.लेकिन बोर्ड एग्जाम में तो किसी तरह सेतो पास हो जातें है लेकिन वैलेंटाइन का पपेर आसानी से पास नहीं हो पाटा है.इसलिए कहते है की एग्जाम देने से पहले पूरी तैयारी अच्छे से कर लेनी चाहिए वरना फ़ैल होने के चांसेस ज्यादा हो जाते है.. 

Thursday, 21 August 2014

                           दो इंसान एक दूसरे से अनजान और बिना मिले हो गया प्यार 

आज की मोस्ट पॉपुलर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट है फेसबुक.हर कोई आज कल फेसबुक पर मिलता है.आज की दुनिया मैं कोई ये नहीं कह सकता की पता नहीं अब कब मिलेंगे क्यूंकि फब जो आ गया है लोगो को जोड़ने के लिए.कोई अपने फ्रेंड से मिल जाता है तो कोई अपने रिश्तेदारों से.लेकिन क्या लव बर्ड्स भी मिल सकते है ऐसा कुछ पता न था शुरुआत में.विनय खन्ना जो की दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढता है और दिल्ली का रहने वाला है.नताशा चैटर्जी जो की एमिटी यूनिवर्सिटी में पढ़ती है और लखनऊ की रहने वाली है.विनय ने एक अच्छी सी प्रोफाइल पिछ लगाई.वैसे मानना तो पड़ेगा की क्या बॉडी है उसकी.क्या सिक्स पैक्स है उसके.वो कहते है न एक दम भोकाली टाइप्स और वही दूसरी ओर नताशा स्लीवलेस बलौर कलर टॉप एंड ब्लैक कलर की कैपरी में अपनी पिछ लगाई.बंदी तो ये भी अच्छी लग रही थी.कमर तक बाल,बड़ी-बड़ी आँखें,गुलाबी होंठ,गोरा रंग.कोई भी देख के तुरंत फिसल जाए.नताशा की फ्रेंड लिस्ट विनय पहले से था.रविवार शाम 6 बजे एक हाथ में चाय का कप ओर दूसरा हाथ लैपटॉप के कीबोर्ड पे,''हाय चार्मिंग लुकिंग ग्रेट इन प्रोफाइल पिक'' विनय ने सेंड किया.पता है किसी नताशा को.''हेलो स्टन्निंग थैंक यू सेंड''किआ नताशा ने विनय को.बातें तो ऐसे हो रही थी की जैसे सालों से एक दूसरे को जानते हो लेकिन ऐसा नहीं था.बात तो पहली बार हुई थी दोनों में.दोनों एक दूसरे पे फ़िदा.दोनों एक दूसरे की तारीफ करने में लगे पड़े थे.चलो अच्छी बात है आखिर दोनों दोस्त बन गए है.आखिर वो मैसेज टाइप कर ही दिया विनय ने ''और बताओ कब मिल रही हो''.आखिर आज्ञा अपनी लाइन पे.बस मौका मिल जाए मिलने का.''माई होम इस इन दिल्ली एंड टुमारो आई आम कमिंग फॉर माई सिस्टर इंगेजमेंट,देन सी यू ओन थर्सडे एट 5 पी.एम.''नताशा ने सेंड कर दिया.''कम सून,आई विल बी वेटिंग फॉर यू''विनय ने सेंड कर दिया.नताशा दिल्ली पहुंची और थर्सडे को विनय से दिल्ली यूनिवर्सिटी के सामने मिलने गयी.ओहफो.नताशा उसे ऐसे देख रही थी जैसे कोई टीचर अपने स्टूडेंट को,पता है क्यों क्यूंकि विनय आधा घंटा देर से आया था.पहली डेट और इतना लेट.आज इसकी खैर नहीं.लेकिन किस्मत अच्छी थी बच गया क्यूंकि पहली बार था ना इसलिए.दोनों कॉफ़ी शॉप पे गए वहां दो कोल्ड कॉफ़ी आर्डर की फिर दोनों बातें करने लगे एक दूसरे के साथ.''आई वांट टू से समथिंग टू यू''विनय ने कहा.व्हाट टेल मी''नताशा ने कहा.आई वांट टू से दैट की की....''अरे व्हाट हैपन सै न''नताशा ने कहा.''आई वांट टू सै दैट की आई लव यू''.बस इतनी सी बात कहनी थी.''सीरियसली यू लव मी'' नताशा ने कहा.हाँ आई लव यू आ लोट'' विनय ने कहा.ये सब बातें हो रही थी और इसे कोई और भी सुन रहा था.पता है कौन ''रिया''विनय की प्रेजेंट गर्लफ्रेंड.अब तो इसकी कायदे से वाट लगने वाली थी.रिया विनय की पीछे वाली सीट पे बैठी थी.विनय ने उसे नहीं देखा था.नताशा को इम्प्रेस करने के लिए विनय ने गुलाब ल फूल निकाला और बैठ गया घुटनों पर पुरे कस्टमर्स के सामने.नताशा ''आई लव यू,आई लव यू वेरी मच ,यू आल्सो लव मी''.नताशा जैसे ही हाँ कहने जा रही थी वैसे ही पीसे दाँतों से पीछे से आवाज़ ''आई या बेबी आई लव यू टू आई कांट लीव विथ आउट यू बेबी.आई लव यू सो मच''.विनय इधर उधर देखने लगा.वो देख ही रहा था की तब तक रिया ने विनय का कालर पीछे से पकड़ा.उसने पीछे मुद कर देखा तो बेचारा डर गया.डरता क्यों नहीं इतनी भयानक जो लग रही थी वो.एक तो रेड ड्रेस,रेड लिपस्टिक और 100 डिग्री से ज्यादा का बॉडी टेम्परेचर.अब तो ये पीटा.बेचारा इतना मार खाया और सिर्फ रिया ने ही नहीं बल्कि नताशा ने भी हाथ साफ़ कर किया.बेचारा बिखरी की हालत में सोफे शॉप से निकला.कपडे फट गए थे उसके.नताशा ने टू कसम खा ली थी की आज के बाद से ''नो फेसबुक प्रपोज़ल्स''.पैच अप होने से पहले ही ब्रेक अप हो गया.विनय को तो नुकसान हुआ ही साथ ही शॉप के मैनेजर कोभी भरपाई करनी पड़ गयी.अरे आखिर दोनों ने मारने के लिए शॉप के सामानों का इस्तेमाल जो किया था.वैसे इससे लगभग ये तो प्रूव हो गया की ना तो कोई लड़कियों के गुस्से में पड़ेगा और ना ही आज से कोई फब पे प्रोपोज़ करेगा...