Tuesday, 19 August 2014

                                                 सपनो ने चुना राजनीति का रास्ता

कॉलेज से जब छुट्टी हुई तो बड़ा सुकून मिला.मैं को एक ख़ुशी मिली चलो अब घर को जाना है.ख़ुशी तो हो रही थी लेकिन साथ ही एक विषय को लेकर दिमाग में कश्मकश भी चल रही थी.वह विषय था मेरे सपनो की दुनिया.गोमतीनगर से राजाजी पुरम तक दिमाग में उछल कूद करते मेरे विचार आखिर घर तक पहुंचे.घर पहुँच कर जब आराम करने के लिए लेती तब सबसे पहला सवाल मेरे मंन में उठा की क्या इस विषय पर हमारी रोली मैम ने भी कभी कुछ लिखा होगा.पता नहीं और ये सब सोचते-सोचते मैं कब नींद की आग़ोश में चली गयी पता ही ना चला.जब नींद खुली तब घडी में 6:30 हो रहे थे.ये समय भी ना कितनी जल्दी बीत जाता है.खैर फिर से रोली मैम का दिया हुआ विषय मेरे सर पे तांडव करने लगा.बार-बार बस दिमाग में एक ही बात चल रही थी रोली मम=मेरे सपनो की दुनिया.खैर ये सब सोचते विचारते घडी में 7:30 बज चुके थे और मै हाथ में कलम और सामने कॉपी खोल कर बैठ गयी थी.अब समझ ना आया की मैं लिखू क्या तभी मेरा माथा ठनका और मैंने अपने आप से कहा''बगल में छोरा,गावं में ढिंढोरा''.अरे जब राजनीति है तो किसी और सपने के बारे में क्यों सोचू.आज का हर युवा राजनीति को गन्दा कहता है.कोई भी इसमें नहीं जाना चाहता है.अगर ये राजनीति गन्दी हुई है तो वो हमारी राजनीति में मीठी-मीठी बातें कर के लोगो को बहलाने वालें हमारे आज कल के नेता है.आज के आम लोग बस इनकी अच्छी-अच्छी बातों और इनकी बड़े-बड़े वादों के बीच फस कर रह गए है.और आज कल तो ये सीन जोरो शोरो से चल रहे है.अरे भाई चुनाव आने वाले है तो इसीलिए आपको 2 घंटे की भाषण वाली मूवी देखने को मिलेगी.जहाँ नरेंद्र मोदी राहुल गांधी को शहजादा बोलने में लगे है और चाय को अपना विजय मार्ग बनाने में लगे है तो वही राहुल गांधी इस समय सय्यम से काम लेते हुए राजनीति नहीं ''काजनीति'' और ''हर हाथ शक्ति,हर हाथ तरक्की'' के माध्यम से लोगो को जोड़ने में लगे हुए है और अब कोई बचा है तो वो है अरविन्द केजरीवाल.वो तो इस समय सिर्फ फुस्सी राकेट की तरह बन कर रह गए है .जो की उड़ा तो बहुत तेजी से लेकिन ऊपर जाकर बाकी रॉकेट्स के जजबो को देखकर कोने से निकल कर चल दिया और नीचे वाले बस ऊपर ही देखते रह गए.आये तो थे वो हज़ारों उमीदों को लेकर लेकिन 48 दिन की सरकार में कुछ ना कर पाने पर,लोकसभा बिल के पास ना होने पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया और उनकी सरकार एक ''ब्रांडेड'' सरकार में बदलने से पहले ''चाइनीज़'' सरकार में तब्दील होते हुए दिखने लगी.आज कल हर भाषण में आपको कुछ ऐसे मुद्दे सुनने को मिलेंगे जो नेताओं के लिए बस बोलने के लिए रह गए है जैसे की भ्रष्टाचार,महगांई,महिलाओं की सुरक्षा,बेहतर शिक्षा,बेरोजगारी,मजबूत प्रधानमंत्री इत्यादि.हर बार सरकार यही वादें कर के आती है और हर बार आम आदमी को निराशा मिलती है,और मिले भी क्यों ना जो सरकार बनती है वो 5 साल तक लोगो के पैसों,उमींदों,भावनाओं से खेलती है और फिर चली जाती है.आखिर कब तक ये सब चलता रहेगा.कब इन इस्तिथियों में सुधार होगा.मेरा सपना यही है की मै एक दिन राजनीति मै जाऊं.उन चीज़ो को जानू,परखू की जो काम हमें इतना मुश्किल दिखाया जाता है क्या वो सही मैं इतना मुश्किल है?क्या सही में इस देश की परिस्तिथि को सुधारना मुश्किल है लेकिन भले ही वो मुश्किल हो लेकिन नामुमकिन नहीं.और अभी जब तक मैं राजनीति मैं नहीं जा रही तब तक मेरा एक ही लक्ष्य रहेगा और वो रहेगा एक सही इंसान को चुन कर उसे जिम्मेदारी देना क्यूंकि''माई वोट इस माई पावर''और जब तक हमारे वोट किसी अच्छे उमीदवार को नहीं मिलेंगे तब तक वो उस कुर्सी पर नहीं बैठ सकेगा और मैं करोड़ों वोटो में अपने अमूल्य वोट को बेकार नहीं जाने दूंगी.आज हर एक को वोट डालने का संकल्प लेना चाहिए क्यूंकि कहते है ना की ''सोच बदलो देश बदलेगा''.हर एक का सपना अपनी सोच बदल कर सही इंसान को चुनना होना चाहिए जिसकी वजह से हम अपने देश को एक अच्छे और नए मार्ग की और अग्रसर होते हुए देख सके...         

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