Saturday, 16 August 2014

बहुत गर्व महसूस होता है यह सोच कर की मैं एक भारतीय हूँ क्यूंकि एक ऐसे देश में जन्म लिया है  जहाँ के रीति रिवाज़,चाल चलन,हमारे दूसरे देशो से अलग है,जहाँ पर इतने धर्म है.हमारा देश हमेशा से एक धार्मिक स्थल के रूप में जाना और माना गया.हमारा देश बहुत सी चीज़ो में दूसरे में दूसरे देशों से अलग रहा है लेकिन शायद हमारा देश एक चीज़ में असफल हो गया है और वो भी आज से नही सदियों से असफल होता चला आ रहा है.हमारा देश जहाँ हमेशा दुर्गा,लक्ष्मी,को पूजा गया है लेकिन शायद लड़की को यह दर्जा दे कर भी उसका सम्मान नही किया गया है.हर जगह लड़की को अपमान का सामना करना पड़ा है.हमारा देश हमेशा से पुरुष प्रधान रहा है.कभी लड़कियों को आगे नही आने दिया है.एक नन्ही सी जान जब अपनी माँ के गर्भ से जुड़ती है,धीरे धीरे अपनी माँ की धड़कनो को महसूस करती है.अपनी माँ के गर्भ में नौ महीने बिताती है और जब वह माँ के गर्भ से निकलती है तोह गिनी चुनी सासें लेती ही है की उसकी सासें कोई और छीन लेता और वह कोई पराया नही होता बल्कि अपना होता वो है उसके माँ-बाप.एक नन्ही सी जान को इसलीए मार दिया जाता है क्यूंकि वो एक लड़की है.हर एक बच्चे को माँ चाहिए,भाई को बहन,पति को पत्नी,बॉयफ्रेंड को गर्लफ्रेंड तोह एक माँ-बाप को बेटी क्यों नही चाहिए.लोग यह क्यों भूल जातें है की जब तक औरत रहेगी तब तक यह दुनिया रहेगी.इस दुनिया सिर्फ एक औरत चला सकती है.अगर लड़की ने किसी तरह जन्म ले भी लिया तोह उसका छोटी उम्र में बाल विवाह करा दिया जाता है.उसे एक बोझ समझा जाता है.ससुराल में सास ससुर और पति द्वारा लड़की पर अत्याचार किया जाता है.उसे दहेज़ के लिए मार पीटा जाता है.अगर पति मर गया तोह लड़की को उसका जिम्मेदार ठहराया जाता है.उसे अपना पूरा जीवन एक सफ़ेद साडी पहन कर बीतना पड़ता है.हमेशा आदमी औरत को अपनी जरुरत के लिए चाहता है और फिर उसे छोड़ देता है.कुछ माँ बाप तोह लड़कियों को बेच देते है सिर्फ इसलिए जिससे उन पर से वह बोझ हमेशा के लिए हट जाए.लड़कियों को कभी इजाजत नही मिली.ना ही तोह किसी लड़की की शर्ते पूरी हो पाती है और ना ही उसका कोई वजूद रह जाता है.एक औरत जो हमेशा दूसरों का ध्यान रखती है,अपनी खुशियां त्याग कर अपनों की खुशियों के बारे में सोचती है,अपना घर छोड़ कर अपनी पूरी ज़िन्दगी दूसरे के घर में जा कर बीतती है,इतना कुछ करने के बाद भी उसे क्या मिलता है कुछ नहीं.पूरी ज़िन्दगी वह बस जलील होती है,बेइज़्ज़ती सहती है,अत्याचार सहती है और सब कुछ सहते-सहते एक दिन वो अपनी आंकेह बंद कर लेती है तब भी किसी को उसके जाने का दुःख नही होता बल्कि लोगो को यह सोच कर ख़ुशी मिलती है की चलो काम से काम एक बला   टली.सदियों से चली आ रही यह सारी प्रथाएं आज भी हमारे देश के पिछड़े वर्गो में निभायी जाती है.ऐसा नहीं है हमारा देश बदला नहीं है आज भी लडकियां आगे बढ़ रही है,पढ़ रही है,नौकरी कर रही है,अपने हक़ के लिए लड़ रही है.आज यह जो भी बदलाव है वो  हमारे देश के कानून और लोगो को मिल रही शिक्षा से है.लेकिन आज भी कई ज़िंदगियाँ अपने हक़ के लिए लड़ रही है और जिन्हे हक़ मिले है वो भी ज़िन्दगी शान्ति से नहीं बीता पा रही है और इसकी वजह है लोगों की कुरुरता.आज हर लड़की को बहार आने जाने में डर लगता है और इसकी वजह से लड़को की हार.लड़की हर तरह से मजबूत है बस अपने शरीर से नहीं है.हर पल लड़की को बलात्कार जैसी चीज़ो से जूझना पड़ता है.जिसकी वजह से कई लडकियां अपने सपने को पूरा नहीं कर पा रही है.                               आखिर क्यों हमेशा लड़की को ऐसे उत्पीड़नों का सामना करना पड़ता है और यह कब तक होता रहेगा.कब लड़कियों को उनका हक़ मिलेगा.आखिर कब दोनों एक समान समझा जाएगा.ऐसे बहुत से सवाल है  जिनका जवाब हर एक लड़की किसी न किसी कोने में ढूंढ रही है.ना जाने कब लोगो की सोच बदलेगी और साथ ही हमारा देश.शायद यह आने वाला वक़्त ही बता सकता है की देश की बिटिया जिन्दा रहेगी या यह दुनिया देश की बेटियों के बिना ही सागर में समा जायेगी.....    

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